Skip to main content

मंगल ग्रह बीज मंत्र विधि और लाभ - Beej Mantra of Mangal Grah

मंगल ग्रह बीज मंत्र

Beej Mantra of Mangal Grah 

मंगल गृह बीज मंत्र, beej mantra of mangal grah,  Beej Mantra for mangal grah in hindi or english,  Beej mantra of mangal grah in english 

मंगल ग्रह बीज मंत्र विधि और लाभ- मंगल ग्रह मेष और वृश्चिक राशिओं का स्वामी गृह होता है। मंगल एक उग्र स्वाभाव का गृह है। यदि किसी की कुंडली में मंगल मारक स्थिति अर्थात शत्रु ग्रह बनकर बैठा हो तब व्यक्ति को छोटी-छोटी बात पर बहुत गुस्सा आता है और मंगल की महादशा और अंतरदशा में यह प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। कुंडली में मंगल की स्थिति खराब होने से व्यक्ति को ज़मीन-जायदात से सबंधित और शत्रु से भय बना रहता है। इसकी ख़राब स्थिति व्यक्ति को करज़ाई भी बना देती है।  मंगल ग्रह बड़े भाई का कारक होता है और यदि मंगल की स्थिति ख़राब हो तो बड़े भाई से सबंध विच्छेद होने का खतरा होता है या बड़े भाई के स्वस्थ्य में परेशानी आ सकती है।  

मंगल ग्रह की स्थिति ख़राब होने पर व्यक्ति को मंगल ग्रह के बीज मंत्र का जाप करके उनको शांत करना चाहिए। मंगल ग्रह को शांत करने के लिए और भी कई प्रकार के टोटके होते हैं, जैसे मंगल की स्थिति ख़राब होने पर 5 मंगलवार धरती में 5 ताम्बे के सिक्के दबाने चाहिए और रोज़ाना सुबह उठने के बाद सबसे पहले धरती को नमस्कार करें क्यूंकि मंगल को धरती का पुत्र माना जाता है। मंगल के बीज मंत्र से मांगलिक दोष का निवारण भी किया जाता है। एक बात का ध्यान जरूर रखें कि यदि आपकी कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति ख़राब हो तब भूल कर भी मंगल ग्रह का रत्न लाल मूंगा धारण मत करें, नहीं तो मंगल का कारकत्व और बढ़ जायेगा और आपकी परेशानियां कम होने की जगह बढ़ जाएंगी। इसलिए कोई भी कार्य करने से पहले अपनी कुंडली का विश्लेषण किसी अच्छे ज्योतिष से करा लें। 

मंगल बीज मंत्र - Beej Mantra for Mangal

ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भोमाय: नमः 
ॐ अंगारकाय नमः 
ॐ भूमिपुत्राय नमः 

Mangal Beej Mantra in English

Om Kram Krim Krum Sah Bhomaye Namha.
Om Angarkaye Namha.
Om Bhumiputraye Namha.

मंगल मंत्र की विधि (Mangal Beej Mantra ki vidhi):- आप ऊपर दिए गए तीन मंगल बीज मन्त्रों में से किसी एक मंत्र का जाप कर सकते हो। इसकी विधि इस प्रकार है।
* मंगल ग्रह को शांत करने के लिए आपने उसके मंत्र की साधना किसी मंगलवार वाले दिन से शुरू करनी है।
*मंगल बीज मंत्र की साधना में मंगल यन्त्र को पूजा स्थान में स्थापित करके मंत्र जाप करने से बहुत लाभ होता है। यन्त्र खरीदने के लिए सिद्ध मंगल यन्त्र पर क्लिक करें। 
* मंगल मंत्र का जाप करने के लिए आपने लाल मूंगे या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना है और लाल आसन पर बैठ कर जाप करना है।
* पहले दिन जाप शुरू करने से पहले गणेश वंदना, गुरु वंदना और कुलदेवता की वंदना करना अनिवार्य है।
* जाप पूर्व या उतर दिशा की और मुख करके करना है।
* यदि संभव हो सके तो जाप करते वक़्त पूजा में गुड़, लाल मसर, तांबा धातु  रखकर बाद में उसका दान करें। मंगल बड़े भाई का कारक है इसलिए यदि आप अपने बड़े भाई की मदद करते हो या उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हो तो आपके लिए लाभकारी होगा।
* यदि आप मंत्र का अधिक लाभ लेना चाहते हो तो आप जितना जाप करते हो उसका दशांश (दसवां हिस्सा) मंगल बीज मंत्र की आहुति देकर हवन करें। यदि आप हवन की विधि नहीं जानते हो तो हमारे पेज सरल हवन विधि पर क्लिक करके जानकारी प्राप्त कर सकते हो।  
* मंगलवार वाले दिन हनुमान मंदिर में जाकर लडूओं का प्रसाद बाँटने से भी मंगल देव प्रसन्न होते हैं। 

कुंडली दिखाए:- आप घर बैठे कुंडली का विश्लेषण करा सकते हो। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण में लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली, नवमांश कुंडली, गोचर और अष्टकवर्ग, महादशा और अंतरदशा, कुंडली में बनने वाले शुभ और अशुभ योग, ग्रहों की स्थिति और बल का विचार, भावों का विचार, अशुभ ग्रहों की शांति के उपाय, शुभ ग्रहों के रत्न, नक्षत्रों पर विचार करके रिपोर्ट तैयार की जाती है। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण की फीस मात्र 500 रुपये है।  Whatsapp- 8360319129 Barjinder Saini (Master in Astrology) 
यदि आप घर बैठे फ्री में ज्योतिष शास्त्र सीखना चाहते हो तो हमारे पेज Free Astrology Classes in Hindi पर क्लिक करें| 

Comments

Popular posts from this blog

राहु बीज मंत्र विधि और लाभ - Rahu Beej Mantra in hindi

राहु बीज मंत्र का महत्व Beej Mantra of Rahu in hindi राहु बीज मंत्र विधि और लाभ - राहु और केतु छाया ग्रह होते हैं। इनको अदृश्य ग्रह भी कहा जाता है। राहु को नाग का मुख भी कहा जाता है। राहु ग्रह का प्रत्येक कुंडली में बहुत अधिक महत्व होता है। यह ग्रह कुंडली के जिस भाव में बैठता है, जिस राशि के साथ बैठता है और जिन ग्रहों पर अपनी दृष्टि डालता है, उन सबको प्रभावित करता है। कुंडली में राहु को शनि से भी अधिक पापी ग्रह माना गया है। राहु को शनि का छाया ग्रह कहा जाता है। राहु की तीन दृष्टियां जिन ग्रहों और भावों पर पड़ती है वह सब राहु से प्रभावित होते हैं। कुंडली में यदि राहु अच्छी स्थिति में हो तब भी यह व्यक्ति को गलत कार्यों से ही सफलता प्रदान करता है क्यूंकि राहु का कारक शराब, नशीली दवायें, जुआ-खाना, जेल, चरस, हस्पताल आदि होते हैं और यह योग कारक अर्थात बलि होने पर भी व्यक्ति को इन क्षेत्रों के द्वारा सफलता प्रदान करते हैं। राहु व्यक्ति की बुद्धि को चतुर तो करता है मगर राहु व्यक्ति की बुद्धि को उल्ट कार्यों में ही लगाता है। राहु के शुभ होने पर व्यक्ति शराबखाने, जुए, कीटनाशक दवाएं, हस्पताल, शमशा

शुक्र बीज मंत्र विधि और लाभ - Beej Mantra of Shukra Grah

शुक्र ग्रह बीज मंत्र   Beej Mantra for Shukra Grah शुक्र बीज मंत्र जपने का महत्व - कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति योग कारक और बलशाली होने पर व्यक्ति सुख-वैभव, ऐशो-आराम, सुंदर एवं सुशील पत्नी, भोगों का सुख आदि से संपन्न होता है| शुक्र दानव ग्रह होते हुए भी एक सौम्य ग्रह है|हम ऐसा भी कह सकते हैं कि शुक्र ग्रह सुख-सुविधाओं का ग्रह होता है| यह व्यक्ति को रंक से राजा बनाने वाला ग्रह होता है|  मगर यदि कुंडली में शुक्र की स्थिति अच्छी ना हो तब उस व्यक्ति को सुख-सुविधा में कमी, पत्नी सुख में कमी, पुरुष के शुक्राणुओं में कमी, समाज में प्रतिष्ठा की कमी होती है| यदि आपकी कुंडली में शुक्र मारक होकर बैठा है, शत्रु राशि में है या त्रिक भावों में बैठा है और किसी तरह का योग इसकी काट नहीं कर रहा तब आप शुक्र ग्रह के बीज मंत्र का जाप करके शुक्र ग्रह के कारकत्व को मारकत्व में बदल सकते हो| शुक्र ग्रह का बीज मंत्र व्यक्ति को सभी प्रकार के सुख देने में समक्ष होता है| शुक्र ग्रह की कृपा होने पर व्यक्ति जगत में विख्यात होने लगता है| यदि आप अभिनेता, मॉडलिंग जैसे क्षेत्र में जाने के इच्छुक हो तो आप शुक्र बीज मं

चंद्र देव बीज मंत्र विधि और लाभ - Beej Mantra of Chandra Grah

चंद्र देव बीज मंत्र विधि और महत्व  Beej Mantra of Chandra Grah                                         चंद्र देव बीज मंत्र विधि और लाभ- चंद्र देव को कुंडली में बहुत अहम् ग्रह माना जाता है क्यूंकि चंद्र ग्रह हमारे मन का कारक गृह होता है। हमारी जन्म कुंडली में भी चंद्र राशि को बहुत महत्व दिया गया है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली देखते वक़्त उसकी चंद्र कुंडली और चंद्र राशि पर विचार किया जाता है क्यूंकि चंद्र मन का कारक होने के कारण हमारे मन को प्रभावित करता है इसलिए चंद्र राशि से ही व्यक्ति के स्वाभाव के बारे में विचार किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र ग्रह कमजोर हो या मारक हो तब उस व्यक्ति का मनोबल बहुत कम हो जाता है और वह छोटी-छोटी बात पर चिंतित रहने लगता है। इस तरह के लोगों को डिप्रेशन जैसी बीमारी होने का खतरा बना रहता है। यदि जन्म कुंडली में चंद्र योग कारक अर्थात मित्र ग्रह होकर भी बैठा हो और कमजोर अवस्था में हो तब भी चंद्र अपने फल देने में समक्ष नहीं होता है। यदि आपने पता करना है कि आपकी कुंडली में चंद्र ग्रह कमजोर है या बलि है तो अपनी जन्म तिथि को पंचांग में देखिये। यदि

गुरु (बृहस्पति) बीज मंत्र विधि और लाभ -Beej Mantra of Brihaspati (Guru)

बृहस्पति (गुरु) बीज मंत्र  Beej Mantra of Brihaspati (Guru) गुरु (बृहस्पति) बीज मंत्र विधि और लाभ - बृहस्पति (गुरु) ग्रह को ज्ञान और अध्यात्म का ग्रह कहा जाता है। सभी देवताओं यहाँ तक कि शिव, विष्णु और ब्रह्मा के गुरु भी बृहस्पति ग्रह ही हैं। धनु और मीन राशियों के स्वामी बृहस्पति (गुरु) ग्रह हैं। बृहस्पति  सौम्य और देव ग्रहों की श्रेणी में आते  है। यदि किसी की कुंडली में बृहस्पति ग्रह योग कारक और बलि होकर बैठे हो तो वह व्यक्ति ज्ञानी और आध्यात्मिक होता है। यदि किसी की कुंडली में बृहस्पति (गुरु) ग्रह मारक होकर बैठे हो या कुंडली के त्रिक भावों में बैठे हों और विपरीत राज योग ना बन रहा हो तब व्यक्ति में आध्यात्मिक ज्ञान की कमी, समाज में प्रतिष्ठा की कमी, कार्य क्षेत्रों में बांधा आती है। बृहस्पति ग्रह का बीज मंत्र व्यक्ति की इन अड़चनों को ख़तम करता है। वैसे भी किसी भी राशि वाला यदि बृहस्पति बीज मंत्र का जाप करता है तो उसके ज्ञान में बहुत वृद्धि होती है और वह अपने ज्ञान से जगत में विख्यात होता है। याद रहे यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति (गुरु) ग्रह मारक होकर बैठा हो या त्रिक भावों में बैठा हो तब

सूर्य देव बीज मंत्र विधि और लाभ - Surya dev mantra sadhna in hindi

सूर्य देव मंत्र साधना Surya dev Mantra sadhna in hindi सूर्य देव बीज मंत्र विधि और लाभ  (Benefits of Surya dev Mantra Sadhna):- हमारी पृथ्वी में मनुष्य, जीव-जन्तुओं और वनस्पति का अस्तित्व सूर्य देव से ही संभव है। आप कल्पना करके देखिए यदि हमारे ब्रह्माण्ड में सूर्य ही ना हो तो हमारा जीवन कैसा होगा और क्या हम जीवित रह सकते हैं। हिन्दू धर्म के वैदिक ग्रंथों में सूर्य देव को नारायण का अंश कहा गया है हम ऐसे भी कह सकते हैं कि साक्षात् नारायण भगवान अपनी किरणों से समस्त जगत का पालन-पोषण कर रहे हैं। हमारे ग्रंथों में सूर्य साधना का इतना महत्व लिखा है कि यदि किसी व्यक्ति पर सूर्य देव प्रसन्न हो जाएं तो वह अपनी कृपा दृष्टि से व्यक्ति को अपने सामान चमका देते हैं और व्यक्ति को इस काबिल बना देते हैं कि वह संसार में अपने कार्यों की प्रसिद्धि से सूर्य देव के सामान एक अलग पहचान बना लेता है। सूर्य देव की साधना व्यक्ति को प्रसिद्धि दिलाती है और हम आपको आगे सूर्य देव मन्त्र और उसकी साधना की विधि बताते हैं। यदि किसी की कुंडली में सूर्य मारक स्थिति में हो तब व्यक्ति को सूर्य की महादशा और अंतरदशा में बहुत कष

शनि बीज मंत्र विधि और लाभ - Beej Mantra for Shani dev in hindi

शनि ग्रह बीज मंत्र   Beej Mantra for Shani dev in hindi  शनि बीज मंत्र विधि और लाभ - सबसे धीमी चाल चलने वाले शनि देव यदि किसी व्यक्ति पर प्रसन्न हो जाएं तो उस व्यक्ति को रंक से राजा बना देते हैं और यदि शनि देव अपनी क्रूर दृष्टि किसी व्यक्ति पर डाल दें तो उस व्यक्ति को राजा से रंक भी बना देते हैं| शनि ग्रह को लेकर हमारे लोगों में काफी भ्रांतियां फैलाई जाती हैं कि यदि किसी व्यक्ति के ऊपर शनि की महादशा, अंतर दशा, ढैया (2.5 वर्ष), साढ़सति (7.5 वर्ष) की दशा चलती है तो शनि देव उस व्यक्ति को कष्ट देना शुरू कर देते हैं या कई लोग इंटरनेट या टेलीविज़न में अपनी राशि के आधार पर शनि का ढैया या साढ़ेसाती की दशा का फल देखना शुरू कर देते हैं| मगर आपको बता दें कि कुंडली में शनि की स्थिति देखने के लिए काफी कुछ देखना पड़ता है और फिर हम किसी परिणाम तक पहुँच सकते हैं कि शनि आपको अच्छा फल देंगे या बुरा फल देंगे| कुंडली में शनि की अच्छी या बुरी स्थिति देखने के लिए देखा जाता है कि शनि योग कारक है या मारक, शनि कुंडली के कौन से भाव में स्थित है, शनि सूर्य के साथ अस्त है कि नहीं, शनि शत्रु राशि में स्थित तो नहीं| यह